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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 222
परेण तु दशाहस्य न दद्यान्नापि दापयेत्‌ । आददानो ददच्चैव राज्ञा दण्ड्यौ शतानि षट्‌ ।।
दश दिन के बाद तो (खरीदी हुई वस्तु को) नहीं वापस दे और बेची (हुई वस्तु को राजा) नहीं वापस दिलवावे। (बेची हुई वस्तु को) बलात्कार से लेता हुआ और खरीदी हुई वस्तु को) देता हुआ ६० पण (८।१३६) से राजा द्वारा दण्डनीय होता है।
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