(महर्षि भृगुजी ऋषियों से कहते हैं कि-) धर्मात्मा राजा आम या जाति समूह में समय भंग करने (शर्त तोड़ने) वालों के लिए यह (८।२१९-२२०) दण्ड विधान करे।
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