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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 22
धर्मासनमधिष्ठाय संवीताङ्गः समाहितः । प्रणम्य लोकपालेभ्यः कार्यदर्शनमार भेत्‌ ।।
(धर्मकार्य देखने के लिए) धर्मासन पर बैठकर, शरीर को ढँककर, एकाग्रचित्त होकर तथा लोकपालों को प्रणाम कर सभासद कार्य अर्थात्‌ मुकदमे को आरम्भ करें।
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