मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 219
निगृह्य दापयेच्चैनं समयव्यभिचारिणम्‌ । चतुः सुवर्णान्‌ षणिणष्कांश्छतमानं च राजतम्‌ ।।
अथवा उक्त समय भंग करने (शर्त तोड़ने) वाले को राजा निग्रहकर उससे चार 'सुवर्ण' (८।१३४) 'छ: निष्क' (८।१३७) या 'शतमान' (८।१३७) अर्थात्‌ ३२० रत्ती चाँदी का दण्ड (जुर्माना) दिलावे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें