निगृह्य दापयेच्चैनं समयव्यभिचारिणम् ।
चतुः सुवर्णान् षणिणष्कांश्छतमानं च राजतम् ।।
अथवा उक्त समय भंग करने (शर्त तोड़ने) वाले को राजा निग्रहकर उससे चार 'सुवर्ण' (८।१३४) 'छ: निष्क' (८।१३७) या 'शतमान' (८।१३७) अर्थात् ३२० रत्ती चाँदी का दण्ड (जुर्माना) दिलावे।
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