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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 217
एष धर्मोऽखिलेनोक्तो वेतनादानकर्मणः । अत ऊर्ध्व प्रवक्ष्यामि धर्म समयभेदिनाम्‌ ।।
महर्षि भृगुजी ऋषियों से कहते हैं कि वेतन लेकर काम करने वालों का यह (८।२१५-२१७) सम्पूर्ण धर्म मैंने कहा, अब आगे समय भङ्ग करने (शर्त तोड़ने) वालों का धर्म (दण्डादि की व्यवस्था) कहता हूँ।
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