भृतो ऽनारत्तो न कुर्याद्यो दर्पात्कर्म यथोदितम् ।
स दण्ड्यः कृष्णलान्यष्टौ न देयं चास्य वेतनम् ।।
तन पानेवाला जो कर्मचारी स्वस्थ रहता हुआ भी कहने के अनुसार काम नहीं करे तो राजा उसे आट कृष्णल (सतती) सुवर्ण आदि से दण्डित कर और उसका वेतन नहीं दिलवावे।
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