(महर्षि भृगुजी ऋषिओं से कहते हैं कि-) दिये गये धन को नहीं लौटाने पर यह धर्मयुक्त विधान कहा, इसके बाद वेतन नहीं देने पर विधान को मैं कहूँगा।
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