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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 211
धर्मार्थ येन दत्तं स्यात्कस्मैचिद्याचते धनम्‌ । प्रश्नाच्च न तथा तत्स्यान्न देयं तस्य तद्भवेत्‌ ।।
धर्मार्थ (यज्ञादि कार्य के लिए) माँगनेवाले किसी को धन दे दिया गया हो (अथवा देने का वचन दिया गया हो) और वह धन धर्मकार्य में नहीं लगाया जाय तो दाता उस दिये गये धन को वापस ले लेवे (अथवा देने का वचन दिया हो तो मत देवे)।
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