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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 208
रथं हरते चाध्वर्यर््ह्माधाने च वाजिनम्‌ । हाता वाऽपि हरेदश्चमुद्राता चाप्यनः क्रये ।।
किन्हीं शाखावालों के आधान में अध्वर्यु रथ को, ब्रह्मा तेज घोड़े को, होता घोड़े को तथा उद्गाता सोमलता को खरीदने पर उसे वहन करने (ढोने या लाने) वाली गाड़ी को प्राप्त करता है।
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