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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 204
नोन्मत्ताया न कुष्ठिन्या न च या स्पृष्टमैथुना । पूर्व दोषानभिख्याप्य प्रदाता दण्डमर्हति ।।
पगली, कुष्ठ रोग वाली और क्षतयोनि (विवाह से पहले मैथुन की हुई) कन्या के दोषों को पहले बतलाकर कन्यादान करनेवाला दण्डभागी नहीं होता।
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