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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 202
नान्यदन्येन संसृष्टरूपं विक्रयमर्हति । न साव्यं न च न्यूनं न दूरे न तिरोहितम्‌ ।।
अधिक मूल्यवाली वस्तु में थोड़े मूल्यवाली वस्तु (यथा कुङ्कम में कुसुम्म, घी में वनस्पति, इत्यादि) को मिलाकर साधारण वस्तु को अत्युत्तम बतलाकर तौल में कम और दूर या अन्धकार आदि के कारण जिसका वास्तविक रूप नहीं मालूम पड़ता ऐसी वस्तुएँ नहीं बेची जा सकती।
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