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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 201
अथ मूलमनाहार्य प्रकाशक्रयशोधितः । अदण्ड्यो मुच्यते राज्ञा नाष्टिको लभते धनम्‌ ।।
स्वामी नहीं होने पर किसी वस्तु को बेचनेवाले से निश्चित रूप से सर्व प्रत्यक्ष (बाजार में) खरीदनेवाला यदि उस बेचनेवाले को परदेश चले जाने या मर जाने आदि के कारण नहीं ला सके तो खरीदनेवाले अदण्डनीय उस व्यक्ति को राजा छोड़ दे (दण्डित न करे); किन्तु बेचे हुए उस वस्तु को खरीदनेवाले से उस वस्तु का स्वामी प्राप्त करता है।
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