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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 20
यस्य शूद्रस्तु कुरुते राज्ञो धर्मविवेचनम्‌ । तस्य सौदति तद्राष्ट्रं पङ्के गौरिव पश्यतः ।।
जिस राजा के राज्य के विचार शूद्र करता है; उस राजा के देखते-देखते उसका राज्य कीचड़ में फँसी हुई गौ के समान दुःखित होता है।
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