सम्भोगो दृश्यते यत्र न दृश्येतागमः क्वचित् ।
आगमः कारणं तत्र न सम्भोग इति स्थितिः ।।
जिस किसी वस्तु का उपभोग देखा गया हो और उसके मिलने का साधन नहीं देखा जाय अर्थात् यह वस्तु इस मनुष्य के यहाँ खरीदने से आयी या दानादि से ऐसा कोई प्रमाणीभूत साधन नहीं देखा जाय तो उस वस्तु के आने के कारण को ही मुख्य मानना चाहिये, उपभोग को नहीं, ऐसी शास्त्रमर्यादा है।
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