यदि दूसरे की वस्तु उक्त प्रकार (८।१९३) से बेचनेवाला (उस बेची गयी वस्तु के स्वामी के) वंश का (पुत्र आदि सम्बन्धी) हो तो उसे राजा ६०० पण दण्ड (जुर्माना) करे और उस बेची गयी वस्तु के स्वामी के वंश का नहीं हो और उस वस्तु के स्वामी या उसके पुत्र आदि से वह (बेची गयी) वस्तु दान में या बेचने से नहीं मिली हो तो उस वस्तु को बेचनेवाला वह मनुष्य चोर के पाप को प्राप्त करता है अर्थात् राजा को उसे चोर के समान दण्डित करना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।