जो मनुष्य (किसी वस्तु का स्वामी नहीं होता हुआ भी उस वस्तु के) स्वामी की आज्ञा लिये बिना ही दूसरे की कोई वस्तु बेच दे और (इस प्रकार) चोर होता हुआ भी वह अपने को चोर नहीं माने तो राजा उसके साक्षी को प्रमाणित नहीं माने।
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