मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 192
उपधाभिश्च यः कश्चित्परद्रव्यं हरेन्नरः । ससहायः स हंतव्यः प्रकाशं विविधैर्वधैः ।।
जो मनुष्य कपट से (“तुम पर राजा क्रुध हैं, इतना धन मुझे दोगे तो मैं तुम्हारी रक्षा कर दूँगा' इस प्रकार कहकर या धनादि का लोभ देकर) दूसरे का धन हरण करे, उसे इस काम में सहायता देनेवालों के साथ सब लोगों के सामने राजा अनेक प्रकार के वधों (हाथ-पैर काटने, बाँधने या कोड़े या बेतों से मारने) से मारे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें