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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 191
निक्षेपस्यापहत्तार तत्समं दापयेद्दमम्‌ । तथोपनिधिहत्तरमविशेषेण पार्थिवः ।।
राजा (या न्यायाधीश) निक्षेप का हरण करने (वापस नहीं देने) वाले मनुष्य से उतना ही धन दिलवा दे तथा उपनिधि को हरण करनेवाले मनुष्यों को भी वही (उतना ही) दण्ड दे अर्थात्‌ धरोहर के बराबर धन दिलवा दे।
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