यो निक्षेपं नार्पयति यश्चानिक्षिप्य याचते ।
तावुभौ चौरवच्छास्यौ दाप्यौ वा तत्समं दमम् ।।
जो दिये हुए धरोहरों को वापस नहीं करता तथा जो धरोहर को बिना दिये ही माँगता है; उन दोनों को न्यायाधीश (सोना, मोती और मणि जवाहरात) आदि उत्तम द्रव्य का विषय होने पर) चोर के समान दण्डित करे तथा (ताँबा आदि सामान्य द्रव्य का विषय होने पर) उसके बराबर अर्थदण्ड से दण्डित करे अर्थात् उतना रुपया जुर्माना करे।
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