चौरैर्हृतं जलेनोढमग्निना दग्धमेव वा ।
न दद्याद्यदि तस्मात्स न संहरति किंचन ।।
धरोहर रकखे हुए द्रव्य में-से धरोहर को लेनेवाला स्वयं कुछ नहीं ले और वह धरोहर का द्रव्य चोरी हो जाय, पानी की बाढ़ में वह जाय या आग लगने से जल जाय, तो धरोहर लेनेवाले से धरोहर देनेवाला कुछ नहीं पाता है।
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