सब प्रकार के धरोहरों के देने को अस्वीकार करने पर उसका निर्णय करने के लिए उक्त विधान (“साक्ष्यभावे-') (८।१८२) आदि कहा गया है। यदि मुहरबन्द धरोहर लेनेवाला ज्यों ता त्यों (ठीक-ठीक मुहरबन्द) धरोहर को वापस कर दे तथा उसे खोलने पर उसमें से कुछ नहीं ले तो धरोहर देनेवाले स्वामी को कुछ नहीं मिलता हैं।
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