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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 187
निक्षेपेष्वेषु सर्वेषु विधिः स्यात्परिसाधने । समुद्रे नाप्नुयात्किचिद्यदि तस्मान्न संहरेत्‌ ।।
सब प्रकार के धरोहरों के देने को अस्वीकार करने पर उसका निर्णय करने के लिए उक्त विधान (“साक्ष्यभावे-') (८।१८२) आदि कहा गया है। यदि मुहरबन्द धरोहर लेनेवाला ज्यों ता त्यों (ठीक-ठीक मुहरबन्द) धरोहर को वापस कर दे तथा उसे खोलने पर उसमें से कुछ नहीं ले तो धरोहर देनेवाले स्वामी को कुछ नहीं मिलता हैं।
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