मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 185
स्वयमेव तु यो दद्यान्मृतस्य प्रत्यनन्तरे । न स राज्ञाऽभियोक्तव्यो न निक्षेप्तुश्च बन्धुभिः ।।
धरोहर देनेवाले के मर मर जाने पर यदि उसके पुत्र या उत्तराधिकारी के लिए उस धरोहर को लेनेवाला स्वयं वापस लौटा दे तो राजा या धरोहर देनेवाले स्वामी के उत्तराधिकारी बान्धवादि या पुत्र को धरोहर वापस करनेवाले उस व्यक्ति पर अन्य द्रव्य के बाकी रह जाने का आक्षेप नहीं करना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें