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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 184
निक्षेपोपनिधी नित्यं न देयौ प्रत्यनन्तरे । नश्यतो विनिपाते तावनिपाते त्वनाशिनौ ।।
निक्षेप तथा उपनिधि पिता के जीवित रहने पर उसके पुत्र या अन्य उत्तराधिकारी को नहीं देना चाहिये; क्योंकि उसके देनेवाले के मर जाने पर वे (निक्षेप तथा उपनिधि) नष्ट हो जाते हें और जीवित रहने पर कभी नष्ट नहीं होते (इस कारण अनर्थ होने के भय से वैसा न करे)।
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