स यदि प्रतिपद्येत यथान्यस्तं यथाकृतम् ।
न तत्र विद्यते किचिद्यत्परैरभियुज्यते ।।
फिर यदि धरोहर लेनेवाला वह व्यक्ति ज्यों का त्यों उसे वापस कर दे तो न्यायाधीश समझे कि पहले धरोहर वापस नहीं देने की शिकायत करनेवाले व्यक्ति ने उसके यहाँ धरोहर नहीं रक्खा था।
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