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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 181
साक्ष्यभावे प्रणिधिभिर्वयोरूपसमन्वितैः । अपदेशैश्च संन्यस्य हिरण्यं तस्य तत्त्वतः ।।
दिये गये धरोहर के साक्षी नहीं होने पर न्यायाधीश वय (बचपन को छोड़कर युवा वृद्ध आदि) तथा रूप (सौन्दर्यं आदि) से युक्त गुप्तचरों से चोरी होने या राजा के छीन लेने आदि उपद्रवों का बहाना कराकर वास्तविक सुवर्ण या रुपया आदि को उसी धरोहर लेनेवाले के यहाँ धरोहर के रूप में रखवा दे तथा उस धरोहर लेनेवाले से उस धरोहर को माँगे अर्थात्‌ उन गुप्तचरों से माँगने को कहे।
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