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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 173
यस्त्वधर्मेण कार्याणि मोहात्कुर्यान्नराधिप: । अचिरात्तं दुरात्मानं वशे कुर्वन्ति शत्रवः ।।
जो राजा लोभादि के कारण अधर्म कार्यों को करता है, उस दुरात्मा राजा को शत्रु लोग शीघ्र वश में कर लेते हैं।
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