व्यवहार (मुकदमे) को ठीक न देखने पर (न्यायाधीश के उचित न्याय न करने पर) अधर्म का प्रथम चतुर्थांश अधर्म करने वालों को, द्वितीय चतुर्थांश गवाह (साक्षी) को, तृतीय चतुर्थांश सदस्यों (न्यायाधीशों राजा द्वारा नियुक्त जज, मजिस्ट्रेट आदि) को तथा चतुर्थ चतुर्थांश राजा को मिलता है।
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