मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 167
बलाहत्तं बलाद्धुक्तं बलाद्यच्चापि लेखितम्‌ । सर्वान्बलकृतानर्थानकृतान्मनुरब्रवीत्‌ ।।
बलात्कार से जो (नहीं देने योग्य वस्तु) दिया गया हो, जो (भूमि, भूषण आदि) भोगा गया हो, अथवा (ऋण लेने या चक्रवृद्धि आदि सम्बन्धी) लेख (हैंडनोट, दस्तावेज आदि) लिखवाया गया हो; बलात्कार से कराये गये उन सब कार्यों को मनु ने नहीं किया गया अर्थात्‌ अमान्य बतलाया है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें