मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 164
योगाधमनविक्रीतं योगदानप्रतिग्रहम्‌ । यत्र वाऽप्युपधिं पश्येत्तत्सर्व विनिवर्तयेत्‌ ।।
जो वस्तु कपट से बन्धक रक्खी गयी हो, बेची गयी हो; दी गयी हो या दान ली गयी हो; अथवा जहाँ पर कपट व्यवहार देखा गया हो वह सब नहीं किये के बराबर हो जाता है अर्थात्‌ अमान्य होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें