सत्या न भाषा भवति यद्यपि स्यात्रतिष्ठिता ।
बहिश्चेद्धाष्यते धर्मान्नियताद्व्यावहारिकात् ।।
"मैं ऐसा करूंगा" इस प्रकार की बात लेख आदि के द्वारा निर्णीत करने पर भी यदि धर्म (शास्रमर्यादा), कुल परम्परा और व्यवहार से प्रतिकूल कही गयी हो तो वह सत्य (प्रामाणिक) नहीं होती।
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