पूर्व (८।१६१) श्लोकोक्त प्रतिभू को यदि ऋणी ने ऋण का धन दे दिया है तथा ऋणदाता ने धन वापस देने को नहीं कहा है, ऐसी अवस्था में यदि वह प्रतिभू मर जाय और और उसका पुत्र उस ऋण के धन को अपनी सम्पत्ति में से चुकाने में समर्थ हो तो वह ऋणी के ऋण को चुकता कर दे, ऐसी शास्त्र मर्यादा है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।