प्रातिभाव्यं वृथादानमाक्षिकं सौरिकं च यत् ।
दण्डशुल्कावशेषं च न पुत्रो दातुमर्हति ।।
प्रतिभू (जमानतदार) होने से दिया जानेवाला, हँसी-मजाक आदि में भंड आदि को देने के लिए कहा गया, जुआ खेलने में हारा या लिया गया, मद्यपान में लिया गया, राजदण्ड (जुर्माने) का और नाव गाड़ी आदि के भाड़े का बाकी धन उसके पुत्र को नहीं देना पड़ता है।
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