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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 157
यो यस्य प्रति भूस्तिष्ठेद्दर्शनायेह मानवः । अदर्शयन्स तं तस्य यतेत स्वधनादूणम्‌ ।।
जो व्यक्ति ऋण लेने में ऋणी का प्रतिभू (जमानतदार) रहे; वह यदि (समय पर) उस ऋणी को उपस्थित नहीं करे तो अपनी सम्पत्ति से उस ऋण को चुकता करे।
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