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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 156
समुद्रयानकुशला देशकालार्थदर्शिनः । स्थापयन्ति तु यां वृद्धिं सा तत्राधिगम प्रति ।।
जलमार्ग तथा स्थलमार्ग के जानकर तथा इतने स्थान या इतने समय में इस विक्रेय वस्तु (सौदे) को पहुँचाने से इतना लाभ होगा इसको यथावत्‌ समझनेवाले व्यापारी आदि उस नियत स्थान तक पहुँचाने या उतने समय तक काम करने से जो वृद्धि (भाड़ा) निश्चित कर दे, उस स्थान तक वस्तु आदि पहुँचाने या उतने समय तक काम करने की वही वृद्धि (भाड़ा) प्रमाणित मानी जाती है।
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