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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 154
अदर्शयित्वा तत्रैव हिरण्यं परिवर्तयेत्‌ । यावती सम्भवेद्वृद्धिस्तावती दातुमर्हति ।।
यदि ऋणी सूद देने में असमर्थ हो तो सूद को मूल धन में जोड़कर जो धनराशि हो उतने का कागज (हैण्डनोट आदि) लिख दे, ऐसा करने पर उस धन (सूद सहित मूल धन) का सूद भी ऋणी को (ऋणदाता के लिए) देना होगा।
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