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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 150
कुसीदवृद्धिद्वेँंगुण्य नात्येति सकृदाहिता । धान्ये सदे लवे वाह्ये नातिक्रामति पञ्चताम्‌ ।।
मूल धन के एक साथ लिया गया सूद मूल धन के दुगुने से अधिक नहीं होता और अन्न, वृक्ष का फल, ऊन, भारवाहक जीव (बैल, ऊँट, गधा आदि बहुत दिनों के बाद भी) मूल के पंचगुने से अधिक नहीं होते।
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