वृषो हि भगवान्धर्मस्तस्य यः कुरुते त्वलम् ।
वृषलं तं दिदुर्देवास्तस्माद्धर्म न लोपयेत् ।।
भगवान धर्म को “वृष” (काम अर्थात् मनोभिलषित को बरसानेवाला) कहते हैं, जो मनुष्य उसका वारण (नाश) करता है, उसे देवता लोग वृषल' (धर्म को लेने या काटने वाला) अर्थात् शूद्र कहते हैं, अतएव धर्म का नाश न करे।
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