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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 147
अजडश्चेदपोगण्डो विषये चास्य भुज्यते । भग्नं तद्व्यवहारेण भोक्ता तद्‌धनमर्हति ।।
यदि किसी सम्पत्ति का स्वामी जड़ (पागल आदि) या सोलह वर्ष से कम आयु वाला (नाबालिग) न हो और उसके सामने अर्थात्‌ जानकारी में ही उसकी सम्पत्ति (भूमि आदि का) उपभोग दूसरा कोई व्यक्ति दश वर्ष से कर रहा हो, तब व्यवहार के अनुसार उस सम्पत्ति पर उसके स्वामी का अधिकार नष्ट हो जाता (नहीं रहता) है तथा भोग करनेवाला व्यक्ति उस सम्पत्ति को पाता है।
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