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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 144
आधिश्चोपनिधिश्चोभौ न कालात्ययमर्हतः । अवहार्यौ भवेतां तौ दीर्घकालमवस्थितौ ।।
बन्धक रक्खी हुई या प्रेम से भोग के लिए अर्थात्‌ मंगनी दी हुई वस्तु समय अधिक बीत जाने पर भी समय बीतने के नियन्त्रण योग्य नहीं होती है, अतएव नियत समय बीत जाने पर भी उन वस्तुओं को देनेवाला जब मांगे तभी वे वस्तुएँ वापस कर देनी चाहिये।
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