मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 142
न त्वेवाधौ सोपकारै कौसीदी वृद्धिमाप्नुयात्‌ । च चाधेः कालसंरोधान्निसर्गोऽस्ति न विक्रयः ।।
भूमि (घर या खेत) तथा गौर आदि रेहन (गिरवी) रखकर ऋण लेने पर उनका उपभोग करता हुआ ऋणदाता ऋणी (ऋण लेनेवाले) से सूद नहीं लेता तथा अधिक समय बीत जाने पर (मूलधन राशि के दुगुना हो जाने पर) भी ऋणदाता रेहन रखी हुई सम्पत्ति (भूमि गोधन, आदि) को न तो किसी दूसरे को देने का अधिकारी है और न बेचने का।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें