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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 140
द्विकं शतं वा गृह्णीयात्सतां धर्ममनुस्मरन्‌ । द्विकं शतं हि गृह्णानो न भवत्यर्थकिल्बिषी ।।
अथवा सज्जनों के धर्म को स्मरण करता हुआ ऋणदाता दो प्रतिशत अर्थात्‌ दो रुपये सैकड़ा प्रतिमास सूद ले, दो प्रतिशत सूद लेनेवाला ऋणदाता पापभागी नहीं होता।
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