(सूद (व्याज) पर त्रण देनेवाला महाजन) वसिष्ठ मुनि द्वारा प्रतिपादित धनवर्द्धक सूद ले व ऋणद्रव्य का १/८० भाग अर्थात् सवा रुपया प्रतिशत मासिक सूद लेना चाहिए।
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