(न्यायालय में ऋण लेनेवाले के) ऋण लेना स्वीकार कर लेने पर ऋण द्रव्य का पाँच प्रतिशत और असत्यता से ऋण लेना स्वीकार नहीं करने पर उसे दश प्रतिशत दण्डित करना चाहिये, ऐसा मनु भगवान् का आदेश है।
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