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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 137
पणानां द्र शते सार्धे प्रथमः साहसः स्मृतः । मध्यमः पञ्च विज्ञेयः सहस्रं त्वेव चोत्तमः ।।
ढाई सौ पणों का “प्रथम (पहला) साहस” कहा गया है, पाँच सौ पणों का “मध्यम साहस” तथा एक सहस्र पणों का एक “उत्तम साहस” जानना चाहिये।
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