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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 136
धरणानि दश ज्ञेयः शतमानस्तु राजतः । चतुः सौवर्णिको निष्को विज्ञेयस्तु प्रमाणतः ।।
दश रौप्य (चाँदी का) धरणों का एक राजत (चाँदी का) “शतमान” जानना चाहिये और प्रमाण से चार सुवर्णो का एक 'निष्क' (अशर्फी) जानना चाहिये।
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