उन सोलह रौप्य मापकों का एक 'रौप्यवरण' तथा “राजत” अर्थात् चाँदी का 'पुराण' और ताँबे के कर्ष (पैसे) को 'कर्ष' तथा 'पण' कहते हैं।
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