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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 133
सर्षपाः षट्‌ यवो मध्यस्त्रियवं त्वेककृष्णलम्‌ । पञ्चकृष्णलिको माषस्ते सुवर्णस्तु षोडश ।।
छः गौर सर्षपों का एक "मध्ययव" (न अत्यन्त मोटा और न अत्यन्त महीन), तीन मध्ययवों का एक 'कृष्णल' (रत्ती), पाँच कृष्णलों (रत्तियो का एक “मासा') (मासा अर्थात्‌ एक आना भर) सोलह मासों (मासाओं = १६ आने भर) का एक सुवर्ण अर्थात्‌ एक रुपया भर = ८० रत्तीभर (जानना चाहिए)।
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