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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 132
सरेणवोऽष्टौ विज्ञेया लिक्षैका परिमाणतः । ता राजसर्षपस्तिस्रस्ते त्रयो गौरसर्षपः ।।
आठ त्रसरेणु का एक लिक्षा, तीन लिक्षाओं का एक “राजसर्षप”, तीन राजसर्षपों का एक 'गौरसर्षप' जानना चाहिए।
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