खिड़की आदि के छिद्र से सूर्य किरण के प्रवेश करते रहने पर जो सूक्ष्म धूलि (चमकता हुआ धूलिकण) दिखलायी पड़ती है, उसा (दिखलाई पड़नेवाले धूलि कण) को प्रमाणों के बीच में प्रथम प्रमाण "त्रसरेणु" कहते हैं।
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