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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 130
लोकसंव्यवहारार्थ याः संज्ञाः प्रथिता भुवि । ताम्ररूप्यसुवर्णानां ताः प्रवक्ष्याम्यशेषतः ।।
(भृगु मुनि महर्षियों से कहते हैं कि-) लोगों के व्यवहार के लिए ताँबे-चाँदी तथा सुवर्ण (सोने) की जो संज्ञयें (प्रमाण-विशेष) प्रसिद्ध हैं, उन सभी को मैं कहूँगा।
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